रिश्तों को संभालने के लिए कैसे निकालें फुर्सत?
आज हमारी फुर्सत ना जाने इस भागदौड़ में कहां खो गई | यह सच है कि हम पहले से कहीं ज़्यादा व्यस्त हो गए हैं, लेकिन यह व्यस्तता हमारी ख़ुद की ही बढ़ाई हुई है| हमने सुविधाओं और ज़रूरतों के अंतर को ख़त्म कर दिया है| इसलिए अब हमे ही निकालनी होगी फुर्सत अपने रिश्तों को संभालने के लिए| शॉर्टआउट करें - क्या ज़रूरी है और क्या ग़ैरज़रूरी|सही हैं की समय कम है, लेकिन ये तो बिलकुल ही झूट हैं की - समय है ही नहीं| तो चलिए कुछ टिप्स को अपना कर अपनों के साथ रिश्तों को संभालने|
ऑफिस आते - जाते समय ट्रेन या बस में ज़रूरी फोन निपटा लें|
अपने रिश्तेदारों का हालचाल पूछ लें|
फोन और लैपटॉप को भी छुट्टी के दिन छुट्टी मनाने दें|
किसी दिन हाफ डे लेकर घरवालों को कहीं बाहर ले जाएं|
शुक्रवार की शाम दोस्तों के साथ बिताएं |
शनिवार की शाम अपनों के साथ बिताएं |
सारे ज़रूरी काम शनिवार को दिन में कर लें|
संडे को घर पर रहकर सबके साथ समय बिताएं|
आज हमारी फुर्सत ना जाने इस भागदौड़ में कहां खो गई | यह सच है कि हम पहले से कहीं ज़्यादा व्यस्त हो गए हैं, लेकिन यह व्यस्तता हमारी ख़ुद की ही बढ़ाई हुई है| हमने सुविधाओं और ज़रूरतों के अंतर को ख़त्म कर दिया है| इसलिए अब हमे ही निकालनी होगी फुर्सत अपने रिश्तों को संभालने के लिए| शॉर्टआउट करें - क्या ज़रूरी है और क्या ग़ैरज़रूरी|सही हैं की समय कम है, लेकिन ये तो बिलकुल ही झूट हैं की - समय है ही नहीं| तो चलिए कुछ टिप्स को अपना कर अपनों के साथ रिश्तों को संभालने|
ऑफिस आते - जाते समय ट्रेन या बस में ज़रूरी फोन निपटा लें|
अपने रिश्तेदारों का हालचाल पूछ लें|
फोन और लैपटॉप को भी छुट्टी के दिन छुट्टी मनाने दें|
किसी दिन हाफ डे लेकर घरवालों को कहीं बाहर ले जाएं|
शुक्रवार की शाम दोस्तों के साथ बिताएं |
शनिवार की शाम अपनों के साथ बिताएं |
सारे ज़रूरी काम शनिवार को दिन में कर लें|
संडे को घर पर रहकर सबके साथ समय बिताएं|








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