भारत में शीत ऋतु में मनाये जाने वाले त्योहारों को बहुत महत्त्व होता है । इस मौसम में सर्द के साथ नए कपड़ों , मिठाईयों , दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ पूरा भारत देश भिन्न - भिन्न प्रकार के पर्व मानतें हैं। तो चलिए एक नजर इन त्योहारों पर डालतें हैं ।
दीपावली : इस ऋतु के स्वागत में दीपावली मनाई जाती हैं। दीपावली दशहरा के 20 दिन बाद अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता है। इसे भगवान राम के 14 साल का वनवास काटकर अपने राज्य में लौटेने की खुशी में मनाया जाता है। देवी लक्ष्मी की पूजा के बाद आतिशबाजी का दौर शरु होता है।
छठ पर्व : छठ पर्व में बांस निर्मित सूप, टोकरी, मिट्टी के बरतनों, गन्ने के रस, गु़ड़, चावल और गेहूं से निर्मित प्रसाद और सुमधुर लोकगीतों से युक्त होकर लोक जीवन की भरपूर मिठास का प्रसार करता है। बिहार और झारखंड में फिर छठ पर्व को बड़े हर्षपूर्वक मनाया जाता हैं । इस दिन सूर्यदेव की आराधना की जाती हैं।
क्रिसमस : क्रिसमस ईसाइयों का प्रमुख त्योहार है । यह त्योहार विश्वभर में फैले ईसा मसीह के करोड़ों अनुयायियों के लिए पवित्रता का संदेश लाता है तथा उनके बताए हुए मार्गों व उच्च आदर्शों पर चलने हेतु प्रेरित करता है । इस त्योहार को प्रतिवर्ष अंग्रेजी महीने के अनुसार दिसंबर की 25 तारीख को मनाया जाता है क्योंकि प्रभु ईसा मसीह का जन्म इसी शुभ तिथि में हुआ था ।
गुजरात कैट फेस्टिवल : इस पर्व को उत्तरन या मकर संक्रांति भी कहा जाता हैं। इस पर्व को हेर वर्ष १४ एवं १५ जनुअरी को मनाया जाता है । इस दिन सभी उम्र के लोग पतंग उड़ाने में लगे रहते हैं ।
लोहरी : इस पर्व को पंजाब में बड़े ही हर्षपूर्वक मनाया जाता हैं । इसे वर्ष के सबसे छोटी दिन में मनाया जाता हैं
पंजाबी फोक डांस ,सरसों डा साग और होलिका इस पर्व का मुख्य ध्यान का केंद्र होता हैं ।
माघ बिहू : इस पर्व को भोगली बिहू भी कहा जाता है। इसे असम में फसल काटने के ख़ुशी में मनाया जाता हैं। सुंगा पीठा, तील पीठा वा लड्डू एवं खेल जैसे टेकेली भोंगा इस पर्व का मुख्य ध्यान का केंद्र होता हैं।
ताई पोंगल : यह पर्व तमिल नाडु में नई फसल के काटने की ख़ुशी में मनाई जाती हैं । इसे चार दिन तक मनाया जाता हैं । आम तौर पैर इसे १३ से १६ जनुअरी तक मनाया जाता हैं । भोगी पंदिगाई ,पोंगल पंदिगाई ,माटु पोंगल एवं कानूम पोंगल के नाम से इसे मनाया जाता हैं। जल्लिकट्टू महोत्सव, तमिलनाडु के पोंगल पर्व पर मट्टू पोंगल के दिन होने वाला बैलों की दौड़ वाला महोत्सव है।
कैमआल फेस्टिवल : इस पर्व को बीकानेर में बड़े हेर्ष के साथ मनाया जाता हैं ।इस पर्व को जनुअरी के महीने में मनाया जाता हैं ।इस पर्व का मुख्य ध्यान का केंद्र होता हैं - लोकनृत्य, म्यूजिक, कला और सुंस्कृति का प्रदरसेंन, ऊँठ रेसेस , ऊँठ डांसेज , ऊँठ का ऊबड़ वा गला हिलाना आदि ।
विंटर कार्निवाल मनाली : विंटर कार्निवाल के जरिये हिमाचल प्रदेश हमारे सामने एक नया मंज़र तैयार करती हैं ।इस पर्व का मुख्य ध्यान का केंद्र होता हैं - लोकनृत्य, विंटर स्पोर्ट्स एवं साइट्स एंड साउंड्स ।
जैसलमेर डेजर्ट फेस्टिवल : यह पर्व को भी शीत ऋतू में ही मनाया जाता हैं । ऊँठ परेड , फंसली ड्रेस ,कैमल पोलो , कैमल रेसेस , कला -सुंस्कृति ,संगीत एवं डांस इस पर्व का मुख्य ध्यान का केंद्र होता हैं।
गोवा कार्निवाल फेस्टिवल : फेब्रुअरी के महीने में मनाया जाने वाला यह पर्व गोवा को ना केवल गोआवासियों के लिए बल्कि टूरिस्ट्स के लिए भी मुख्य ध्यान का केंद्र बनाता हैं ।इसे तीन दिनों तक मनाया जाता हैं ।
कूच रणउत्सव : यह गुजरात में मनाया जाने वाला पर्व हैं ।इस पर्व को मानाने के लिए लोग दूर - दूर से यहां आते हैं । कला ,सुंस्कृति,संगीत और नाच से पर्व का मुख्य केंद्र बिंदु हैं ।
माउंट आबू विंटर फेस्टिवल : राजस्थान में इस पर्व को २९ –३१ दिसम्बर तक मनाया जाता हैं ।इस पर्व का मुख्य ध्यान का केंद्र होता हैं- पारंपरिक नृत्य, संगीत कार्यक्रम, मेला , आतिशबाजी का प्रदर्शन, लोक नृत्य, पतंगबाजी, गर्म हवा वाली गुब्बारेबाजी ।

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